CoWIN पोर्टल पूरी तरह से सुरक्षित, केंद्र ने कहा- हैक नहीं हुआ 15 करोड़ भारतीयों का डेटा


केंद्र सरकार ने कहा, CoWIN पोर्टल पूरी तरह से सुरक्षित है.

हाल ही ऐसी खबरें सामने आईं जिसमें कहा गया था कि भारत के वैक्‍सीन रजिस्ट्रेशन पोर्टल ‘CoWIN’ को किसी ने हैक (Hack) कर लिया है. इसके साथ ही कहा गया कि पोर्टल (Portal) से 15 करोड़ भारतीयों का डेटा तक चोरी कर लिया गया है.

नई दिल्‍ली. कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर (Corona Third Wave) को देखते हुए जहां सरकार कोरोना वैक्‍सीन (Corona Vaccine) प्रोग्राम में तेजी ला रही है, वहीं कुछ लोग सरकार के इस मिशन को कमजोर करने में लगे हुए हैं. हाल ही ऐसी खबरें सामने आईं, जिसमें कहा गया था कि भारत के वैक्‍सीन रजिस्ट्रेशन पोर्टल ‘CoWIN’ को किसी ने हैक (Hack) कर लिया है. इसके साथ ही कहा गया कि पोर्टल (Portal) से 15 करोड़ भारतीयों का डेटा तक चोरी कर लिया गया है. इसे पूरे मामले पर अब केंद्र सरकार की ओर से सफाई दी गई है. सरकार ने ऐसी किसी भी रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया है और कहा है ‘CoWIN’ पोर्टल पूरी तरह से सुरक्षित है और किसी भी भारतीय का डेटा चोरी नहीं हुआ है.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से इस बात की जानकारी दी गई कि ऐसी कई रिपोर्ट सामने आ रही है कि ‘CoWIN’ प्लेटफॉर्म हैक हो चुका है. हमारी टीम ने जांच में इन खबरों को फर्जी पाया है. पोर्टल पर मौजूद सभी जानकारी पूरी तरह से सुरक्षित हैं. हालांकि मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच कम्प्यूटर इमरजेंसी रेस्पॉन्स टीम Empowered Group on Vaccine Administration (EGVAC) से कराई जा रही है.

EGVAC के अध्यक्ष डॉक्टर आर एस शर्मा ने बताया कि सोशल मीडिया पर भारत के वैक्‍सीन पंजीकरण पोर्टल ‘CoWIN’ के हैक होने की खबरें चल रही हैं. हम सभी को बता देना चाहते हैं कि ‘CoWIN’ पर सभी डेटा पूरी तरह से सुरक्षित है. ‘CoWIN’ पर मौजूद जानकारी को किसी के साथ ही शेयर नहीं किया गया है.इसे भी पढ़ें :- कोरोना वैक्‍सीन लगवाने में महिलाएं पीछे, 1000 पुरुषों में 854 ने ही लगवाया टीका

बता दें कि डार्क लीक मार्केट नामके एक हैकर समूह ने ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी थी कि उनके पास 15 करोड़ भारतीयों का डेटा मौजूद हैं, जिन्‍होंने वैक्‍सीन पंजीकरण पोर्टल ‘CoWIN’ पर अपने आपको रजिस्‍टर कराया था. हैकर ने ये भी बताया था कि वह इन जानकारी को 800 डॉलर में आगे बेचने जा रहे हैं. हालांकि, इस ट्वीट के बाद कुछ रिपोर्ट्स में डार्क लीक मार्केट को ही फर्जी हैकर बता दिया गया था.









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