दिल्ली दंगाःआरोपी नरवाल को पीएचडी के लिए मिली अस्थायी पंजीकरण की इजाजत


नयी दिल्ली. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) ने बृहस्पतिवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को सूचित किया कि छात्रा नताशा नरवाल को पीएचडी कार्यक्रम के लिए अस्थायी पंजीकरण दिया गया है. नरवाल पिछले साल उत्तर-पूर्वी दिल्ली हिंसा से संबंधित मामलों में आरोपी हैं. न्यायमूर्ति प्रतीक जालान को विश्वविद्यालय द्वारा सूचित किया गया कि प्राधिकारों द्वारा नरवाल को जारी नोटिस के कारण लंबित कार्यवाही के दौरान भी उनके पंजीकरण के अनुसार वह अस्थायी पंजीकरण के सभी लाभों की हकदार होंगी.

अदालत ने जेएनयू की तरफ से पेश अधिवक्ता मोनिका अरोड़ा के बयान को रिकॉर्ड में लिया और कहा कि आगे कोई आदेश पारित करने की आवश्यकता नहीं है और याचिका का निपटारा कर दिया. अधिवक्ता अरोड़ा ने कहा कि ‘पिंजरा तोड़’ मुहिम की कार्यकर्ता नरवाल को मॉनसून सेमेस्टर 2020 और शीतकालीन सेमेस्टर 2021 के पीएचडी कार्यक्रम में अस्थायी रूप से पंजीकृत किया गया है.

अदालत पीएचडी कार्यक्रम के तीसरे सेमेस्टर में अस्थायी रूप से पंजीकरण करने की अनुमति का अनुरोध करने वाली नरवाल की याचिका पर सुनवाई कर रही थी. नरवाल ने विश्वविद्यालय को अस्थायी पंजीकरण प्रक्रिया को पूरा करने के लिए लॉगिन आईडी और पहचान पत्र प्रदान करने के लिए निर्देश देने का भी अनुरोध किया.

नताशा-देवांगना-आसिफ की जमानत रद्द करने की याचिका पर सुनवाई टली

नॉर्थ ईस्ट दिल्ली दंगा मामले में तीन आरोपियों को जमानत देने के दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई चार हफ्ते के लिए टाल दी. दिल्ली पुलिस ने दंगे के आरोपियों को मिली जमानत और यूएपीए को लेकर की गई दिल्ली हाई कोर्ट की टिप्पणी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.

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